प्रेरणा स्तोत्र

खरतरगच्छाधिपति श्री जिनकैलाशसागरसूरीश्वर जी म.सा. के पाट पर विराजमान, नमिऊण – लब्धि निधान तीर्थ के प्रणेता, जोगी पहाड़ी तीर्थोध्दारक, मधुरभाषी , ऋजुमना , संत शिरोमणि, युवाओं के प्रेरणास्रोत, खरतरगच्छ सहस्त्राब्दि महामहोत्सव के प्रेरक, छत्तीसगढ़ श्रृंगार, संयम सारथी,पूज्यपाद आचार्य गुरुदेव श्री जिन पीयूषसागरसूरीश्वर जी म.सा. के चरणों में वंदन।आपका जन्म मिक्सर सुदी 12‌ (8 दिसंबर 1962) को जमुना बाई की कुक्षी से हुआ। आपके पिता का नाम नेमि चंद जी पारख है आपका सांसारिक नाम प्रदीप जी पारख था। आप श्री को फाल्गुन सुदी 2 (21 फरवरी 1985) को श्री जिन उदय सागर सुरीश्वर जी मरासा के द्वारा संयम अंगीकार करवाया गया। आपके दीक्षा गुरु श्री जिन महोदय सागर सुरीश्वर जी म.सा. है।आप श्री के 41 शिष्य-प्रशिष्य है। आपकी निश्रा में 50 से अधिक साधु साध्वी कि दीक्षा संपन्न हुई। आपकी निश्रा में अनेको अंजन शलाका प्रतिष्ठाए संपन्न हुई। आप श्री की निश्रा में अनेकों उपधान भी संपन्न हुए और आप श्री कि ही निश्रा में जिनेश्वर युवक परिषद का भी गठन हुआ।

जिनेश्वर युवक परिषद् के उद्देश्य :-
जैन धर्म के प्राचीन मन्दिरों, प्राचीन दादावाडियो आदि की व्यवस्था,जीर्णोद्वार व रख रखाव करना ।
जहां आवश्यकता हो, वहां जिन मंदिर का निर्माण करना, करवाना तथा निर्माण में सहयोग देना ।
जैन धर्म के साधु व साध्वी भगवंतों की वैयावच्च करना ।
धार्मिक पाठशालाओं की स्थापना करना ।
जैन धर्म के साधर्मिकों की योग्य सहायता करना ।